नई दिल्ली। पश्चिम एशिया और दक्षिण एशिया में तेजी से बदलते सुरक्षा समीकरणों के बीच तुर्किये, पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच बढ़ता रक्षा सहयोग भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुए रक्षा समझौते के बाद तुर्किये की संभावित भागीदारी ने इस गठजोड़ को लेकर चर्चाएं तेज कर दी हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, सऊदी अरब की आर्थिक ताकत, पाकिस्तान की सैन्य एवं परमाणु क्षमता और तुर्किये की आधुनिक रक्षा तकनीक इस संभावित त्रिकोण को प्रभावशाली बना सकती है। तुर्किये और पाकिस्तान के बीच पहले से ही ड्रोन, युद्धपोत और लड़ाकू विमान तकनीक के क्षेत्र में सहयोग जारी है।
बदलते हालात में भारत के लिए इजरायल के साथ रक्षा और तकनीकी सहयोग का महत्व और बढ़ जाता है। दोनों देशों के बीच मिसाइल, रडार, ड्रोन, खुफिया जानकारी और आधुनिक रक्षा तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग लंबे समय से जारी है।
हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि तुर्किये-सऊदी-पाकिस्तान सहयोग को सीधे तौर पर भारत विरोधी सैन्य गठबंधन मानना जल्दबाजी होगी। फिर भी पाकिस्तान और तुर्किये की नजदीकियों तथा क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में बदलाव के कारण भारत इस घटनाक्रम पर करीबी नजर रख रहा है।
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