नई दिल्ली। सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये के बीच हालिया रक्षा समझौते के बाद पश्चिम एशिया और दक्षिण एशिया के रणनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। तीनों देशों ने मक्का संयुक्त रक्षा समझौते के जरिए एक-दूसरे की सुरक्षा को मजबूत करने और सामूहिक रक्षा सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है।
हालांकि, सैन्य क्षमता की तुलना में भारत को अब भी एक बड़ी क्षेत्रीय शक्ति माना जाता है। भारत के पास विशाल थलसेना, मजबूत वायुसेना और नौसेना के साथ परमाणु क्षमता, लंबी दूरी की मिसाइलें तथा स्वदेशी रक्षा उत्पादन का बढ़ता आधार है। 2025 में भारत का रक्षा खर्च करीब 78.3 अरब डॉलर रहा, जबकि सऊदी अरब करीब 72.5 अरब डॉलर के साथ प्रमुख रक्षा खर्च करने वाले देशों में रहा।
तुर्किये ड्रोन और रक्षा तकनीक के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है, जबकि पाकिस्तान के पास परमाणु क्षमता और युद्ध का अनुभव है। फिर भी तीनों देशों की सैन्य क्षमताओं को भारत के बराबर मानना आसान नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार यह गठजोड़ क्षेत्रीय प्रभाव बढ़ा सकता है, लेकिन इसे फिलहाल औपचारिक ‘इस्लामिक NATO’ कहना जल्दबाजी होगी।
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