Monday, 10 August 2026

NDA के सामने दो-तिहाई बहुमत की चुनौती: लोकसभा में 319, राज्यसभा में 154 सांसदों का समर्थन

परिसीमन और महिला आरक्षण पर समर्थन जुटाने की कोशिश; FCRA संशोधन विधेयक को फिलहाल रोकने के संकेत

नई दिल्ली। संसद के मॉनसून सत्र के अंतिम दिनों में केंद्र सरकार के सामने कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने की चुनौती बनी हुई है। इनमें परिसीमन, महिला आरक्षण और विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) में संशोधन से जुड़े प्रस्ताव प्रमुख हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार इन विधेयकों को लेकर विपक्षी दलों और सहयोगियों से समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है।

बताया जा रहा है कि FCRA संशोधन विधेयक को फिलहाल होल्ड पर रखा जा सकता है। संसद की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी में सत्र के बाकी दिनों के एजेंडे पर चर्चा होनी है, लेकिन शुरुआती कार्यसूची में FCRA संशोधन विधेयक का उल्लेख नहीं है।

परिसीमन और महिला आरक्षण पर समर्थन की तलाश

केंद्र सरकार परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े कानूनों को आगे बढ़ाने के लिए कुछ विपक्षी दलों का समर्थन हासिल करने की कोशिश में है। रिपोर्ट के अनुसार, DMK और NCP (शरदचंद्र पवार) जैसे दलों का समर्थन इस रणनीति में महत्वपूर्ण हो सकता है।

वहीं, इन दलों ने FCRA विधेयक के कुछ कड़े प्रावधानों पर आपत्ति जताई है। ऐसे में माना जा रहा है कि सरकार परिसीमन से जुड़े मुद्दों पर सहमति बनाने के लिए FCRA विधेयक पर फिलहाल सावधानी से आगे बढ़ रही है।

लोकसभा में NDA को कितने वोट चाहिए?

लोकसभा में मौजूदा सांसदों के आंकड़ों के आधार पर दो-तिहाई समर्थन हासिल करने के लिए 360 वोट की जरूरत बताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, NDA के पास फिलहाल करीब 319 सांसदों का समर्थन है।

यदि DMK भी सरकार के साथ आती है तो यह संख्या करीब 346 तक पहुंच सकती है। ऐसे में दो-तिहाई बहुमत के लिए NDA को करीब 14 और सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी।

वहीं, यदि DMK मतदान से बाहर रहती है और कुल मतदान करने वाले सांसदों की संख्या घटती है, तो दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा भी बदल जाएगा।

राज्यसभा में NDA मजबूत स्थिति में

राज्यसभा में NDA के पास फिलहाल करीब 154 सांसद बताए गए हैं। YSR कांग्रेस के चार सांसदों के समर्थन की उम्मीद के बाद यह संख्या और बढ़ सकती है।

रिपोर्ट के मुताबिक, दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने के लिए NDA को करीब छह और सांसदों के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है।

DMK ने FCRA और परिसीमन पर जताया विरोध

DMK की ओर से FCRA को लेकर पहले ही विरोध जताया जा चुका है। पार्टी नेताओं ने परिसीमन विधेयक को लेकर भी अपनी आपत्तियां सार्वजनिक की हैं। ऐसे में सरकार के लिए दोनों मुद्दों पर व्यापक राजनीतिक सहमति बनाना चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।

संसद सत्र के अब सीमित दिन ही बाकी हैं। ऐसे में सरकार के सामने एक ओर महत्वपूर्ण विधेयकों को आगे बढ़ाने की चुनौती है, तो दूसरी ओर पर्याप्त राजनीतिक समर्थन जुटाने की जरूरत है। FCRA विधेयक को फिलहाल कार्यसूची में जगह न मिलना इसी राजनीतिक रणनीति का संकेत माना जा रहा है।


No comments:

Post a Comment

रोहिणी सेक्टर 20-25 के विकास की मांग तेज, फेडरेशन ने उठाए सड़क-सीवर और पानी के मुद्दे

                                                 रोहिणी, योगराज शर्मा। सेक्टर 20-25 फेडरेशन की ओर से रविवार को पॉकेट-10, सेक्टर-22 स्थित से...