Friday, 7 August 2026

अभिजीत दीपके की पीएम मोदी से अपील, 15 अगस्त के भाषण में Gen Z और युवाओं पर करें बात

 

नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर युवाओं और Gen Z को अपने भाषण का प्रमुख हिस्सा बनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री लाल किले से दिए जाने वाले 15 अगस्त के संबोधन में युवाओं के भविष्य और उनके सामने मौजूद चुनौतियों पर बात करें।

दीपके के मुताबिक, प्रधानमंत्री को देश के युवाओं के लिए सरकार की योजनाओं, रोजगार और बेहतर भविष्य को लेकर अपनी सोच स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने लोगों से भी अपील की कि वे अगले कुछ दिनों तक प्रधानमंत्री से इसी मुद्दे को 15 अगस्त के भाषण में शामिल करने का आग्रह करें।

यह अपील ऐसे समय आई है जब भारत में Gen Z से जुड़े युवा आंदोलन और राजनीतिक मुद्दे चर्चा में हैं। दीपके के नेतृत्व में CJP ने हाल में युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर अभियान चलाया है।

दीपके ने यह भी बताया कि CJP आने वाले समय में 'क्या बोलती है पब्लिक' नाम से देशव्यापी अभियान शुरू करने की तैयारी कर रही है। इस अभियान के तहत विभिन्न क्षेत्रों में लोगों से सीधे संवाद कर उनके मुद्दों और राय को समझने की योजना है।

युवाओं से जुड़े मुद्दों पर बढ़ती राजनीतिक सक्रियता के बीच अब सबकी नजर इस बात पर है कि स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री मोदी अपने संबोधन में Gen Z और युवा वर्ग से जुड़े सवालों को कितना महत्व देते हैं।

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अतीक अहमद की तरह अबान को भी था कुत्तों से खास लगाव, शैडो-कल्लू-डैनी से जुड़ी थी कहानी

प्रयागराज। अतीक अहमद के छोटे बेटे अबान अहमद की मौत के बाद उसकी निजी जिंदगी से जुड़े कई पहलू चर्चा में हैं। इनमें उसका कुत्तों के प्रति लगाव भी शामिल है। बताया जाता है कि अबान को विदेशी नस्ल के कुत्ते पालने और उनकी देखभाल करने का खास शौक था।

अतीक अहमद के परिवार में भी लंबे समय से विदेशी नस्ल के कुत्ते पाले जाते रहे हैं। अबान का इन पालतू जानवरों से खास जुड़ाव बताया जाता है। शैडो, कल्लू और डैनी नाम के कुत्तों का जिक्र भी इसी संदर्भ में सामने आया है।

अबान की इस पसंद की चर्चा उसकी सड़क हादसे में मौत के बाद दोबारा शुरू हुई है। हादसे के बाद उसके जीवन से जुड़े व्यक्तिगत पहलुओं को लेकर भी कई जानकारियां सामने आ रही हैं।

अबान अतीक अहमद का सबसे छोटा बेटा था। वर्ष 2023 में उमेश पाल हत्याकांड के बाद उसे और उसके भाई अहजम को बाल संरक्षण गृह में रखा गया था। बाद में दोनों को परिवार की एक रिश्तेदार की देखरेख में सौंप दिया गया था।

अबान की सड़क दुर्घटना में मौत के बाद प्रयागराज और झांसी में यह घटना चर्चा का विषय बनी हुई है। उसके परिवार और निजी जीवन से जुड़ी पुरानी जानकारियां भी अब लोगों के बीच सामने आ रही हैं।

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Thursday, 6 August 2026

असम में गुवाहाटी के पास राष्ट्रीय राजमार्ग-15 से लगे बैहाटा चारियाली से तेजपुर तक 4 लेन मार्ग के निर्माण को मंजूरी

 

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने आज असम में राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 15 के 135.871 किलोमीटर लंबे, चार लेन वाले पहुंच-नियंत्रित गुवाहाटी–तेजपुर कॉरिडोर विकसित करने को मंजूरी दी। यह परियोजना राष्ट्रीय राजमार्ग (मूल) के तहत निर्मित-संचालन-स्थानांतरण (टोल) मोड पर 8,970.20 करोड़ रुपये की लागत से विकसित की जाएगी।

परियोजना के तहत तेजपुर बाईपास पर 4.9 किलोमीटर लंबी आपातकालीन लैंडिंग सुविधा विकसित की जाएगी, जिसे भारतीय वायु सेना के समन्वय से अंतिम रूप दिया गया है। इससे ब्रह्मपुत्र नदी के दक्षिणी किनारे पर स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 27 (पूर्व-पश्चिम कॉरिडोर) पर यातायात भीड़भाड़ कम होगी। इसके अलावा, बैहाटा चारियाली, सिपाझार, खारूपेटिया, ढेकियाजुली और तेजपुर जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में यातायात सुगमता के लिए कुल 58.7 किलोमीटर लंबाई के पांच प्रमुख बाईपास भी बनाए जाएंगे।

इस परियोजना में 15 बड़े पुल, 30 छोटे पुल, 19 फ्लाईओवर तथा तेजपुर बाईपास पर एक हाथी अंडरपास के निर्माण का प्रावधान है। नियंत्रित पहुंच वाले राजमार्ग पर सुगम आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए 46 अंडरपास, 19 फ्लाईओवर के 210 किलोमीटर लंबी सर्विस रोड का भी निर्माण किया जाएगा।

परियोजना से औसत यात्रा गति लगभग दोगुनी होगी, यात्रा समय आधा रह जाएगा, समग्र सड़क सुरक्षा में सुधार होगा, ईंधन खपत कम होगी तथा वाहनों के परिचालन लागत में कमी आएगी। इससे क्षेत्रीय गतिशीलता और सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।

यह परियोजना असम और अरुणाचल प्रदेश के प्रमुख आर्थिक, सामाजिक और प्रचालन केंद्रों को निर्बाध रूप से जोड़ेगी। साथ ही, यह आठ पीएम गति शक्ति आर्थिक केंद्रों (आठ औद्योगिक पार्कों), दो सामाजिक केंद्रों (दरांग और उदलगुरी आकांक्षी जिले), तीन प्रमुख पर्यटन स्थलों (मां कामाख्या मंदिर, काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान और ओरंग राष्ट्रीय उद्यान) तथा सात लॉजिस्टिक केंद्रों (तीन प्रमुख रेलवे स्टेशन, दो हवाई अड्डे और दो जलमार्ग टर्मिनल) तक बेहतर संपर्क प्रदान करेगी, जिससे इस पूरे क्षेत्र में यात्री परिवहन और माल ढुलाई में तेज़ी आएगी।

संभल हिंसा मामले में जांच रिपोर्ट पर सियासी घमासान, सांसद जिया-उर-रहमान बर्क का नाम चर्चा में

 

लखनऊ/संभल। उत्तर प्रदेश के संभल में हुई हिंसा को लेकर तैयार की गई जांच रिपोर्ट के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है। रिपोर्ट में समाजवादी पार्टी के सांसद जिया-उर-रहमान बर्क का नाम प्रमुख आरोपियों में शामिल किए जाने की बात सामने आने के बाद मामला राजनीतिक रूप से और संवेदनशील हो गया है।

जानकारी के अनुसार, जांच एजेंसियों ने हिंसा के दौरान हुई घटनाओं, उपलब्ध साक्ष्यों, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य तकनीकी तथ्यों के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार की है। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई संबंधित एजेंसियों और न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी।

वहीं, समाजवादी पार्टी की ओर से रिपोर्ट और आरोपों पर सवाल उठाए गए हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले न्यायिक प्रक्रिया का पूरा सम्मान किया जाना चाहिए।

दूसरी ओर, राज्य सरकार का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है और हिंसा से जुड़े प्रत्येक मामले में दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल यह मामला जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है।

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विदेशी फंडिंग पर सख्ती केवल भारत तक सीमित नहीं, कई देशों में हैं कड़े कानून

 

नई दिल्ली। विदेशी स्रोतों से मिलने वाले धन के नियमन को लेकर भारत का विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) अक्सर चर्चा में रहता है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी फंडिंग पर निगरानी और नियंत्रण के लिए सख्त कानून केवल भारत में ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई देशों में लागू हैं।

भारत में एफसीआरए का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विदेशी धन का उपयोग देश के कानूनों के अनुरूप और निर्धारित उद्देश्यों के लिए ही किया जाए। इस कानून के तहत विदेशी चंदा प्राप्त करने वाले संगठनों और संस्थाओं को निर्धारित नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है। नियमों के उल्लंघन की स्थिति में पंजीकरण रद्द करने या अन्य कानूनी कार्रवाई का प्रावधान भी है।

अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, इज़राइल, रूस और यूरोप के कई देशों में भी विदेशी वित्तीय सहायता प्राप्त करने वाले संगठनों के लिए अलग-अलग प्रकार के नियामक कानून और पारदर्शिता संबंधी प्रावधान लागू हैं। इनका उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा, वित्तीय पारदर्शिता और सार्वजनिक जवाबदेही को मजबूत करना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर विदेशी फंडिंग से जुड़े नियम प्रत्येक देश की सुरक्षा, राजनीतिक व्यवस्था और कानूनी ढांचे के अनुसार तय किए जाते हैं। इसलिए भारत का एफसीआरए अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में एक अलग व्यवस्था नहीं, बल्कि विदेशी वित्तपोषण के नियमन की व्यापक वैश्विक प्रवृत्ति का हिस्सा माना जाता है।

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झांसी सड़क हादसे में अतीक अहमद के छोटे बेटे अबान की मौत, दो की गई जान, तीन घायल

झांसी/प्रयागराज। माफिया से नेता बने दिवंगत अतीक अहमद के सबसे छोटे बेटे अबान अहमद की गुरुवार को उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में हुए एक भीषण सड़क हादसे में मौत हो गई। हादसे में उनके एक साथी की भी जान चली गई, जबकि तीन अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस ने दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, अबान अपने साथियों के साथ कार से प्रयागराज से झांसी जा रहे थे। बताया जा रहा है कि वह झांसी जेल में बंद अपने भाई से मिलने जा रहे थे। इसी दौरान हाईवे पर उनकी एसयूवी अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, हादसे में अबान और उनके एक साथी की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि घायल लोगों को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया। दुर्घटना की वास्तविक वजह का पता लगाने के लिए पुलिस प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जांच कर रही है।

इस घटना के बाद अतीक अहमद के परिवार को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। वर्ष 2023 में अतीक अहमद, उनके भाई अशरफ और बेटे असद की मौत के बाद अब यह परिवार एक और बड़े हादसे का सामना कर रहा है।

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तरुण तेजपाल मामला फिर चर्चा में, 2013 के गोवा प्रकरण को लेकर बढ़ी दिलचस्पी

नई दिल्ली। वरिष्ठ पत्रकार और तहलका पत्रिका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल से जुड़ा वर्ष 2013 का गोवा मामला एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। इस प्रकरण के संदर्भ में लोगों के बीच यह जानने की उत्सुकता बढ़ी है कि आखिर उस समय क्या घटनाक्रम हुआ था और मामला कैसे आगे बढ़ा।

यह मामला नवंबर 2013 में सामने आया था, जब गोवा के एक होटल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान एक महिला सहकर्मी ने तरुण तेजपाल पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। आरोप सामने आने के बाद गोवा पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और इसके बाद कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ी।

मामले की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने अदालत के समक्ष अपने-अपने तर्क और साक्ष्य प्रस्तुत किए। यह प्रकरण लंबे समय तक न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा रहा और देशभर में मीडिया, कानून तथा कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर व्यापक चर्चा का कारण बना।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले ने कार्यस्थलों पर आचार संहिता, महिलाओं की सुरक्षा और शिकायत निवारण तंत्र को लेकर गंभीर बहस को जन्म दिया। साथ ही, यह मामला भारतीय न्यायिक प्रक्रिया और मीडिया जगत में जवाबदेही से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों में गिना जाता है।

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बंगाल में 325 आपातकाल बंदियों को हर महीने ₹10 हजार पेंशन का ऐलान, शुभेंदु अधिकारी बोले- लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान जरूरी

  ‘पश्चिम बंग लोकतंत्र सेनानी सम्मान’ के तहत सहायता देने की घोषणा; आपातकाल के दौरान जेल गए लोगों को मिलेगा लाभ कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानस...